मनोरंजन

गजल – मधु शुक्ला

क्यों लुभाते हैं गुजरे जमाने,

जब रुलाते हैं गुजरे जमाने।

 

लौटते कोई लम्हे नहीं हैं,

यह बताते हैं गुजरे जमाने।

 

कौन पाया है हक से मुहब्बत,

गुनगुनाते हैं गुजरे जमाने।

 

आपने जो भी खोया कमाया,

वह दिखाते हैं गुजरे जमाने।

 

बात कहती है ‘मधु’ प्रेम से ही,

मुस्कराते हैं गुजरे जमाने।

— मधु शुक्ला,सतना, मध्यप्रदेश

Related posts

किस्मत में कस्तूरी भी हो सकती है- डा० नीलिमा मिश्रा

newsadmin

ग़ज़ल – डा० नीलिमा मिश्रा

newsadmin

आजमाइश करो- राजीव डोगरा

newsadmin

Leave a Comment