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आंखें बोलीं अधर लजाये – राजू उपाध्याय

गीतो की

सुर ताल पर

जो

मौन तुम्हारे

संकेतक थे..!

बांकी

चितवन के

वह दृष्टि तीर

सिद्धि हस्त

आखेटक थे…!

बहुत

दूर से संधान

किया

पर लक्ष्य भेद

करके लौटे,,

आंखें

बोली अधर

लजाएं,

भाव तुम्हारे

आवेदक थे…!

– राजू उपाध्याय, एटा, उत्तर प्रदेश

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