मनोरंजन

बसंत पंचमी – रेखा मित्तल

बसंती सा इश्क मेरा

धरा हो गई बसंती, खिल गए कुसुम

मधुमति गंध उठी अमुवा की डाल से

खेल रही गोरैया सरसों की बाल से

अमृत रस कानों में घोल रही कोयल

लहरा रही फसलें, हर्षित कृषक

मन डोले, कण-कण में आई बहार है

बसंती सा इश्क मेरा,

तुम्हारा ही इंतजार है!!

फूलों की दुनिया गीतों का आलम है

प्रकृति भी,ओढ पीत चुनरिया झूम रही

तितलियाँ फूलों पर मंडरा रही

नव कोंपलें,किसलय आंचल पसार रही

चारों तरफ नव रंग लिए आया मधुमास है

मस्ती का रंग बह रही बसंती बहार है

बसंती सा इश्क मेरा

बस तुम्हारा ही इंतजार है!!

-रेखा मित्तल, सेक्टर-43 ,चंडीगढ़

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