मनोरंजन

ग़ज़ल – शिप्रा सैनी

खिले हैं फूल बासंती, फ़िजा का रंग प्यारा है,

लगे धरती मुहब्बत में, बड़ा दिलकश नज़ारा है।

 

कई परतें छुपाई थी, खुशी की वो कली कोमल,

खिली जब वो कहा सब ने, उसे किसने सँवारा है।

 

कभी सिहरन, कभी उलझन, अजब है ढंग मौसम का,

निकलती ठंड चकमा दे, सभी ने जब नकारा है।

 

गुलाबों की महक बिखरी, चढ़ी सब पर खुमारी है,

गुलाबी रंग गालों पर, असर इसका करारा है।

 

पतंगों पर लगी बाज़ी, उड़ानों का अभी मौसम,

कभी जो कट गयी डोरी, नहीं कोई सहारा है।

– शिप्रा सैनी (मौर्या), जमशेदपुर

Related posts

गीत — अनुराधा पाण्डेय

newsadmin

आराधिका साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी संपन्न

newsadmin

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

Leave a Comment