Neerajtimes,comबहराइच – ‘जुगनू कर सकता नहीं उसे जो काम ज्वलित दिनमान करे, वह हाथ अभी तक मिला नहीं जो हाथ मेरा सम्मान करे’’ इन पंक्तियों के रचयिता और विगत 44 वर्षों से साहित्य साधना में रत डॉ0 अशोक ‘गुलशन’ ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट प्रतिभा से वैश्विक स्तर पर पहचान तो बना ली किन्तु अभी तक इनके साहित्यिक सेवाओं का उचित मूल्यांकन नहीं किया जा सका है| सर्बिया, इटली, ब्राजील और नाइजीरिया से साहित्यिक सेवाओं हेतु जहाँ इन्हें 04 डी0 लिट0 की मानद उपाधि प्रदान की गयी वहीं जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, फिलिस्तीन, मिस्र और भारत से 09 ऑनरेरी डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा भी गया है|
साहित्य के क्षेत्र में अब तक 35 देशों से 513 सम्मान,पुरस्कार, उपाधियों एवं प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित डॉ0 गुलशन को नाइजीरिया और भारत से 09 अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं जिनमें इन्टरनेशनल डायमंड एवार्ड, महात्मा गाँधी इन्टरनेशनल नोबेल पीस एवार्ड, डॉ0 ए० पी०जे० अब्दुल कलाम इन्टर नेशनल अवार्ड, इंटरनेशनल गोल्डन एवार्ड, अंतर्राष्ट्रीय मदर टेरेसा अवार्ड, इंटरनेशनल अचीवर्स एवार्ड, इंटरनेशनल गोल्ड स्टार एक्सीलेंसी एवार्ड, इंटरनेशनल एक्सीलेंसी एवार्ड तथा नोबेल इंटरनेशनल एवार्ड प्रमुख हैं| इनके अतिरिक्त भारत के दिल्ली, म०प्र०, हि०प्र० ,राजस्थान से इन्हें 09 राष्ट्रीय सम्मान, पुरस्कार मिले हैं जिनमें सुर साधना राष्ट्रीय सम्मान, डॉ0 अम्बेडकर भारत-भारती रत्न अलंकार, राष्ट्रीय हिन्दी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान, काव्य विभूति राष्ट्रीय सम्मानोपाधि, राष्ट्रीय काव्य कृति सम्मान, राष्ट्रीय साहित्य रत्न सम्मान, काव्य कौस्तुभ राष्ट्रीय सम्मानोपाधि, राष्ट्रीय रत्न एवार्ड एवं राष्ट्रीय सम्मान एवार्ड प्रदान किये गये हैं |
डॉ0 गुलशन की 25 पुस्तकें प्रकाशित हैं और 26 वीं पुस्तक हिन्दी दिवस पर प्रकाशित हो रही है| इनकी पुस्तकें राजकीय पुस्तकालयों में आपूर्ति की जाती हैं| देश-विदेश की 1206 प्रकार के प्रमुख समाचार पत्र-पत्रिकाओं में इनकी लगभग तीन हजार रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं और साहित्य के क्षेत्र में इन्होंने 55 वर्ल्ड रिकार्ड बनाये हैं जिनमें विश्व की सबसे छोटी ग़ज़ल, सबसे बड़ी ग़जल, सबसे लम्बी ग़जल, दोहा ग़ज़ल, मुहावरा ग़जल, एक वर्ष में सबसे अधिक सम्मान पाने का तथा सबसे अधिक साहित्यिक सम्मान पाने का वर्ल्ड रिकार्ड इनके नाम दर्ज़ है| सबसे लम्बा और अद्वितीय गीत लेखन के लिये वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकार्ड्स लन्दन द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है तथा इनके द्वारा 655 नामों के 12634 हिन्दी अख़बारों के संकलन का रिकार्ड लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड में दर्ज़ किया गया है|
वर्ष 2011-12 में इनके हिन्दी साहित्य में योगदान विषय पर लखनऊ विश्वविद्यालय से एम0फिल0 हुई है तथा बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के पीएच0डी0 के
शोध ग्रन्थ में इनकी छोटी बहर की ग़जल सम्मिलित की गयी है| भारतीय राजदूतावास की ओर से इन्होंने काठमांडू में प्रतिभाग किया है तथा भूटान, थाईलैंड और इंडोनेशिया के विश्व हिन्दी उत्सव में सम्मिलित हुये हैं| आकाशवाणी लखनऊ, जन सन्देश, पूर्वा पोस्ट टी0वी0 तथा नेपालगंज के एफएम चैनल पर इनकी अनेकों रचनायें प्रसारित हुई हैं|
भारत के 17 राज्यों तथा उ०प्र० के 36 जनपदों से सम्मानित डॉ0 गुलशन को राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा इनके कहानी संग्रह ‘ कागज़ के पंख’ पर इक्यावन हजार रूपये की राशि सहित अमृत लाल नागर पुरस्कार, तथा काव्य संग्रह ‘ख्वाब के साये’ पर एक लाख रूपये की सम्मान राशि सहित डॉ0 हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार एवं इंडोनेशिया में एक लाख रूपये की राशि सहित दुष्यन्त कुमार ग़जल सम्मान से सम्मानित किया गया है| समाज सेवा हेतु इन्हें 23 देशों से 49 ऑनरेरी डॉक्टरेट तथा 01 डी0 लिट् सहित 1137 सम्मान, पुरस्कार, उपाधियाँ तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये हैं|
वर्ष 2007 से पद्मश्री पुरस्कार हेतु इनके नाम की संस्तुति जिलाधिकारी, आयुक्त, विधायक, सांसद केन्द्रीय मंत्री, राज्यमंत्री, महामहिम राज्यपाल तथा उ०प्र० सरकार द्वारा की जाती रही है|