मनोरंजन

छप्पय छंद – प्रियदर्शिनी पुष्पा

सावन मास विशेष, लगे प्रिय औघड़दानी।

बिल्वपत्र नैवेद्य , जटाधर आप बखानी।।

 

ज्येष्ठ महीना गर्म, हलाहल में शिव जलते।

शीतल भाव प्रदेय, सुखद जल बारिश पलते ।।

 

पावन उत्तम माह में , करते जल अभिषेक जन।

है पुनीत यह धारणा, हो पवित्र अतिरेक मन।।

 

आया सावन मास, सभी शिव ध्यान लगालो।

काँवर कंधे  डाल , बोल बम शिव को पालो।।

 

नंगे मेरे पाँव , कँटीली लम्बी राहें ।

कैसे पहुँचें धाम, कष्ट से निकली  आहें।।

 

भक्ति पर विश्वास है , महादेव का आस है।

अर्पण गंगा जल करें, वैद्यनाथ  का मास है।।

– प्रियदर्शिनी पुष्पा, धनबाद, बिहार

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