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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

जिंदगी मे बहार लाएं कोई।

प्याऱ देकर मुझे रिझाए कोई।

 

खूबसूरत लगा हमे कोई,

प्याऱ के गीत अब सुनाएं कोई।

 

प्यार जीवन मे आज लाये हम,

कोई रोये कोई मुस्कुराये कोई।

 

आज चाहत को बीच लाये हम,

गीत बस प्याऱ का सुनाए कोई।

 

तेरी यादों का जादू अब दिखता,

नींद मीठी हमे दे जाए कोई।

 

यार झरना सा हुस्न का बहता,

काश डुब के  हमे दिलाएं कोई।

 

चाहते तब जवां बड़ी होती,

प्यार देकर हमें बुलाए कोई।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़

 

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