neerajtimes.com पटना ( डॉ अनमोल कुमार) । सोन घाटी की माटी के गौरव, महान शिक्षाविद् एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. डॉ. पद्मदेव नारायण शर्मा को श्रद्धांजलि सभा में शत्-शत् नमन किया गया।
सोन घाटी की ऐतिहासिक धरती, पटना जिले के मनेर स्थित भवानी टोला में जन्मे प्रो. डॉ. पद्मदेव नारायण शर्मा का जन्म 1 जनवरी, 1928 को बाबू कपिल देव नारायण शर्मा, जिन्हें लोग स्नेह पूर्वक कपिला सिंह के नाम से जानते थे, के बाग में हुआ था। वे मनेर की माटी के ऐसे विलक्षण सपूत थे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा, विद्वत्ता और कर्म निष्ठा से शिक्षा जगत में विशिष्ट पहचान स्थापित की।
प्रो. पी. एन. शर्मा मनेर के प्रथम महान शिक्षाविद् थे, जिन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा की उपाधि प्राप्त की। पटना विश्वविद्यालय में वाणिज्य शिक्षा के विकास और वाणिज्य विभाग की स्थापना में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी शैक्षणिक दूर दृष्टि, प्रशासनिक दक्षता और अथक परिश्रम के परिणामस्वरूप वाणिज्य महाविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय की स्थापना एवं विकास को नई दिशा मिली। वे इस महाविद्यालय के प्राचार्य बने और अपने सेवाकाल के अंत तक इस पद पर बने रहे।
वे केवल एक विद्वान शिक्षक अथवा कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि विद्यार्थियों के लिए साक्षात् देव तुल्य व्यक्तित्व थे। उनका स्नेह, अनुशासन, मार्गदर्शन और ज्ञान के प्रति समर्पण विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा प्रदान करता था। उनके लिए शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण और राष्ट्र की प्रगति का सशक्त माध्यम थी।
शिक्षा जगत के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। वे लगभग तीन दशकों तक पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा के मंत्रिमंडल में उन्होंने बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग एवं सांस्थिक वित्त विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। इस प्रकार उन्होंने शिक्षा, समाज और शासन—तीनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।
आज, 24 अक्टूबर, 2026 को उनकी 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उनके श्रीचरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किया गया। अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें स्मरण करते हुए उनकी महान शैक्षणिक विरासत, आदर्शों और समाज के प्रति समर्पण को भी सादर नमन किया गया।
इस अवसर पर पत्रकार समाजसेवी साहित्यकार डॉ अनमोल कुमार ने उनके आदर्शो की चर्चा करते हुए कहा कि एसे महापुरुष अपनी देह त्यागकर भी अपने विचारों, कर्मों और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के माध्यम से सदैव जीवित रहते हैं। प्रो. पी. एन. शर्मा का जीवन शिक्षा के प्रति समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और लोकसेवा का अनुपम उदाहरण है। उनकी स्मृतियाँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। सभी शिक्षाविदों ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! भावभीनी पुष्पांजलि! शत्-शत् नमन किया।
next post