मनोरंजन

रेशम की डोरिया – श्याम कुमार भारती

रेशम की डोरिया लगा दा पिया पलना।
मगन हो नयन खोले झूले माई झूलना ।

आईल नवरात अब बरत कइल जाइ।
कलसा सजाई खूब पूजा कइल जाई।
मह मह महके खूब धूप मोर अंगना।
मगन हो नयन खोले……।

फूल अडहुलवा के हार बनवावा।
गईया के गोबरा से दुआरा लिपवावा।
नव दिन नौ दुर्गा नमन करा सजना।
मगन हो नयन खोले……।

नरियर केरवा के भोग लगवाईब।
पनवा सुपरिया से मुँहवा सजाइब।
देवी दुर्गा के शरण में हरदम है रहना।
मगन हो नयन खोल झूले माई झूलना।
-श्याम कुंवर भारती ( राजभर)”
बोकारो, झारखंड

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