पानी बिना जिंदगानी –
मिटा कर वजूद जिसका कर रहे हम सब बड़ी है नादानी।
जिसका वजूद हमारा वजूद पानी बिना क्या है जिंदगानी।
उजाड़ के जंगल जमीन रेगिस्तान धरती बना डाला हमने।
जल से हम जंगल जमीन बिना इसके नहीं कोई है कहानी।
तेरी ज्यादतियां –
तुमने छोड़ा दिल टूटा सब कुछ छूटा।
दुनिया फीका तेरे बिना नसीब फूटा।
तुझे कितना चाहा तेरे लिए सब स्वाहा।
करूं किससे गिला तूने ही मुझे लुटा।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो,झारखंड, मॉब.9955509286