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वंदेमातरम् अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, मैहर (मध्यप्रदेश) में भव्य आयोजन सम्पन्न

neerajtimes.com ढोरी (बोकारो) – महिला कल्याण समिति ढोरी, बोकारो एवं कहानिका हिंदी पत्रिका परिवार के तत्वावधान में संस्थापक एवं प्रधान संपादक श्याम कुंवर भारती के प्रमुख संयोजन में सतना रोड स्थित ओंकार होटल, मैहर में भव्य वंदेमातरम् अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्य, कला एवं समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्वों को काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ द्वारा विद्या-वाचस्पति विशेष मानद सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध कवयित्री आशा पाण्डेय ने किया।
द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि पश्चिम मध्य रेलवे बोर्ड, जबलपुर के सदस्य एवं मैहर जिला योजना समिति सदस्य सत्यभान सिंह, काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलसचिव इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’, भारत प्रसाद प्रजापति तथा रमेश प्रसाद प्रजापति की गरिमामयी उपस्थिति में आज़ाद अध्यापक शिक्षक संघ, मैहर के जिलाध्यक्ष देवेंद्र पटेल की अध्यक्षता में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वाणी-वंदना से हुआ, जिसे पूनम दुबे एवं अंजू पाण्डेय ने मधुर स्वर में प्रस्तुत किया।
श्याम कुंवर भारती ने अपनी रचना —
“माँ मैहरवाली देवी जी क महिमा अपरम्पार ह,
ओकर इहलोक अउरी परलोक में समझ हो जाला कल्याण ह…”
प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
अंतर्राष्ट्रीय लोक कलाकार ललित सिंह ठाकुर ने “माँ गंगा का अवतरण गीत” प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
राजेन्द्र तिवारी ‘स्वदेश’ ने अपनी चर्चित रचना —
“शिमला, नैनीताल, मनाली न जाए पहलगाम में,
आओ बच्चों अबकी छुट्टी चलते अपने गाँव में…”
सुनाकर ग्रामीण संस्कृति और अपनत्व की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
पाण्डेय चिदानन्द ‘चिद्रूप’ ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत पंक्तियाँ —
“हिन्द के सैनिक प्यारे वतन के, निर्भीक पहरेदार हम।
हैं जुझारू मुश्किलों वाले, करें चुनौती स्वीकार हम।।”
प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश और उत्साह का संचार कर दिया।
देश के विभिन्न प्रदेशों से उपस्थित रचनाकारों में जगन्नाथ पाण्डेय, गायत्री पाण्डेय, आशा पाण्डेय, राजेश तिवारी (बाँदा), सुरेश प्रसाद जायसवाल, डॉ. उमेश कुमार पाण्डेय, विनय गुप्ता सहित अनेक कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं आयोजन अध्यक्ष ने सभी रचनाकारों को माँ की चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा कहा कि —
“माँ मैहर के पावन धाम में आज शब्द-साधकों ने जो शब्द-राग छेड़ा है, वह समाज को आत्मचिंतन और राष्ट्रचेतना का संदेश देता है।”
प्रमुख संयोजक श्याम कुंवर भारती ने कहा कि भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद सैकड़ों लोगों की उपस्थिति यह सिद्ध करती है कि समाज आज भी मातृशक्ति, संस्कृति और राष्ट्रभावना के प्रति सजग है।
उन्होंने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा —
“शोला यहीं, शबनम यहीं, बारूद यहीं, बम…
गाते रहो रे गीत मीत, वन्देमातरम्…”
अंत में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट जनों को अंगवस्त्र एवं स्मृतिचिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अंजू पाण्डेय (मध्यप्रदेश) ने प्रस्तुत किया।
– शिखा गोस्वामी निहारिका , केंद्रीय सूचना प्रभारी

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