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जिंदगी सजा है – श्याम कुंवर भारती

जो होना है वही होता है सब उसकी रजा है ये किसको पता है,

जिंदगी मजा है या सजा है बोलो ये सब  किसको पता है।

 

प्यार अब व्यापार हुआ आशिक लाचार जार जार रोता है,

प्यार का बदला बेवफाई तन्हाई इश्क सजा पाता है किसको पाता है।

 

भलाई का बदला बुराई बेईमानी करे तो वाह वाही गजब जमाना है,

नेकी करे तो दरिया में जाता लौट फिर नहीं ये आता किसको पता है।

 

झूठा सब रिश्ता नाता खून का रिश्ता कहा टिकता खून के आंसू रोता,

विश्वास बार-बार टूटता कोई अपना बन नहीं पाता ये किसको पता।

 

कोई मरे या जिए किसी को फर्क नहीं पड़ता नहीं कोई आंसू बहाता,

अपना अपनों से मुंह फेर लेता मौके की ताक में रहता ये किसको पता।

 

भारती भगवान तमाशा देख है रोता आदमी-आदमी क्यों नहीं होता,

आदमी दूसरों के सुख देख रोता खुद का चैन है खोता ये किसको पता।

-श्याम कुंवर भारती , बोकारो, ,झारखंड, मॉब.9955509286

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