दूर से मिलने मेरा यार भी आया होगा।
देख तन्हा कि मुझे पास बुलाया होगा।
मोम सा घर न कभी यार बनाना होगा।
जिस्म जल जायेगे जब सर पे न साया होगा।
खुशबू आती है मुझे यार च़मक भी दिखती।
शक्स ऐसा ही मेरी जिंदगी मे आया होगा।
दर्द दिल का वो जमाने को बता भी न सका।
हाय बिन बात ही इस दिल को आज रूलाया होगा।
कितनी कोशिश की भुला दूँ उसे अपने दिल से।
वो निकलता ही नही दिल मे ही छाया होगा।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़