( 1 ) प्रेम
कोई शब्द नहीं,
है सांसों का तराना !
प्रेम है एक भावमयी..,
जीवन की सच्ची आराधना !!
( 2 ) प्रेम
किया जाता नही,
स्वतः ही हो जाता !
प्रेम में कोई आडंबर नहीं..,
इसे सच्चे तन-मन से जिया जाता !!
( 3 ) प्रेम
मोलभाव से मिले नहीं,
प्रेम से ही पाया जा सकता !
प्रेम प्रभु की कृपा निराली..,
इसे प्रेममय होकर ही जिया जाता !!
( 4 ) प्रेम
कोई कामना नहीं,
है निःस्वार्थ सेवा साधना !
दो शुद्धात्माओं का मिलन यही..,
है अपनी प्रसन्नता को दूजे में खिलाना !!
( 5 ) प्रेम
आनंद पनपता वहीं,
जहाँ प्रेम अजस्त्र सागर बहता !
निर्मल मन में खिले प्रेम कमल ही..,
प्रेम है उसकी सच्ची सुगंध मोहकता !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान