राष्ट्रीय

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो- श्याम किशोर

neerajtimes.com – मन व्यग्र हो उठता है जब यह विचार आता है कि प्रकृति और परमात्मा ने सभी मनुष्यों को समान शरीर, समान नयन-नक्श और समान चेतना की संभावना के साथ इस धरती पर भेजा है. जन्म के क्षण में किसी के मस्तिष्क पर न तो श्रेष्ठता का ताज होता है और न ही हीनता का बोझ. फिर यह असमानता कहाँ से जन्म लेती है ? यह प्रश्न आत्मा को झकझोरता है.
उत्तर धीरे-धीरे स्पष्ट होता है-यह अंतर प्रकृति की देन नहीं, बल्कि परिस्थितियों और अवसरों की देन है. जब अवसर सीमित कर दिए जाते हैं, जब शिक्षा तक पहुँच नियंत्रित कर दी जाती है, जब संसाधनों पर कुछ हाथों का अधिकार स्थापित हो जाता है, तब समान जन्म लेने वाले लोग असमान जीवन जीने को विवश हो जाते हैं. यह असमानता शरीर की नहीं, व्यवस्था की निर्मित असमानता है.
आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग-चाहे वह ST/SC हो, OBC हो, Genral Catagary (सामान्य वर्ग) का गरीब हो, या अधिकांश महिलाएं-आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता से पूर्णतः वंचित है. यह स्थिति किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस संरचना की देन है जिसने कुछ को सशक्त और बहुसंख्यकों को निर्भर बनाए रखा.
जब वित्तीय सशक्तिकरण सीमित होता है, तब स्वतंत्र सोच और दूरदर्शिता भी सीमित हो जाती है. क्योंकि भूख और अभाव के बीच संघर्ष करता मन, दर्शन नहीं, केवल अस्तित्व की लड़ाई लड़ता है.
सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ केवल अधिकारों की घोषणा नहीं, बल्कि अवसरों की समान उपलब्धता है. जब साधन समान होंगे, तभी संसाधनों तक समान पहुँच होगी; जब संसाधन समान होंगे, तभी सम्मान स्वतः समान होगा. सम्मान कभी दिया नहीं जाता, वह समान व्यवस्था से स्वतः उत्पन्न होता है.
यदि भारत को विश्व गुरु बनना है, तो यह केवल तकनीकी प्रगति या आर्थिक आकार से संभव नहीं होगा. यह तभी संभव होगा जब-
सम्मान में समानता स्थापित होगी,
संसाधनों में समान भागीदारी सुनिश्चित होगी,
शिक्षा हर व्यक्ति के लिए वास्तविक अधिकार बनेगी,
और व्यवस्था व्यक्ति की जाति, वर्ग या लिंग नहीं, बल्कि उसकी क्षमता और मानवता के आधार पर कार्य करेगी.
नए युग की नींव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण सोच से रखी जाएगी. जब अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी स्वयं को समान भागीदार महसूस करेगा, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र सशक्त होगा.
क्योंकि विश्व गुरु वह नहीं होता जिसके पास सबसे अधिक शक्ति हो,
विश्व गुरु वह होता है जिसके पास सबसे अधिक न्याय हो.
– श्याम किशोर ✍️

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