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प्रेम- सुनील गुप्ता

( 1 ) करें

प्रेम निःस्वार्थ सभी से.,

वही सच्चा प्रेम ईश्वर से मिलवाए !!

( 2 ) करें

लीन प्रसन्नता दूजे में.,

वही प्रेम बन दिल में उतर आए !!

( 3 ) करें

सेवा अनन्य भाव से.,

वही सच्ची सेवा प्रेम कहलाए  !!

( 4 ) करें

कर्म उदात्त भाव से.,

वही कर्म, अकर्म प्रेम बन जाएं !!

( 5 ) करें

सुफल प्रयास हृदय से.,

वही जीवन में प्रेम रसधार बरसाए !!

– सुनील गुप्ता,  जयपुर, राजस्थान

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