मनोरंजन

भूल – रश्मि मृदुलिका

भूल छोटी सी थी मगर,

असर बड़ा कर गई,

असत्य की चादर ओढे,

सो रहे थे हम बेसुध होकर,

भूल का एक झोंका,

सत्य की पहचान करा गई,

सहज, स्वाभाविक होकर,

यदि जीना चाहते हो तुम,

जरूरी है कभी- कभार,

कुछ भूलें कर देना,

कभी अनजाने ही,

या सोच समझकर,

की गई बेतरतीब भूले,

एक पुल की तरह काम कर जाते हैं,

जहाँ से पार हो जातें हैं,

जीवन की ढीठ बाधाएं,

और जाते- जाते समझा जाते हैं

कि अक्सर एक छोटी सी भूल,

जीवन का यथार्थ समझा जाती है,

-रश्मि मृदुलिका, देहरादून , उत्तराखंड

Related posts

डॉ ओमप्रकाश चौधरी पवनन्दन हिंदी के सशक्त हस्ताक्षर- संगम त्रिपाठी

newsadmin

ग़ज़ल – विनोद निराश

newsadmin

हिंदीभाषा.कॉम को मिला हिंदी सेवार्थ अखिल भारतीय पुरस्कार

newsadmin

Leave a Comment