गिर रहा आज राजनीति स्तर दे रहे मा बहनों गालियां कैसे कैसे।
लड़ रहे एक दूसरे से जमकर भांज रहे हैं खूब लाठियां कैसे कैसे।
मुद्दा विहीन राजनीत से भला क्या होगा देश का बताओ जरा।
गाली गलौज के भाषणों पर लोग बजा रहे है तालियां कैसे कैसे।
साफ सफेद चक चक कुर्ते में लगे दाग भी फर्क नहीं पड़ता।
मिले आवास अनाज नहीं लोग पीते पानी नालियां कैसे कैसे।
बना कर झूठ का पुलिंदा बांट रहे पुड़िया घर घर जाकर।
देश विरोधी गुंज रहा है नारा हर शहर हर गलियां कैसे कैसे ।
बात बांटने की नहीं देश जोड़ने की बात करो तो कोई बात बने।
हर बुराई का दे रहे सब साथ नेता बना रहे हैं टोलियां कैसे कैसे ।
चर्चा विकाश शिक्षा स्वास्थ समाज की करो तो लोग भी मानेंगे ।
धर्म भाषा जाती द्वेष फैला जला रहे संविधान होलियां कैसे कैसे।
विरोध करो तुम दुश्मनों गद्दारों और कट्टरवाद तो नेता बनो।
भारती भ्रष्ट नेता मना रहे है छुप कर रंगेलिया कैसे कैसे।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखण्ड