मनोरंजन

पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

गर मैं कहूं प्यार आपसे नहीं है मान तो नहीं लोगे।

पूछूं आपसे दिल में मेरे कौन है जान तो नहीं लोगे।

 

बिना आपके दिल नहीं लगता मेरा कही जान लो।

कहता हूं आपको जान आप मेरी जान तो नहीं लोगे।

 

डाल सकता हूं कदमों आपके सिर्फ एक इशारे पर।

आसमान से तोड़ कही आप तारे चांद तो नहीं लोगे।

 

बना रखा है पागल मुझे जलवा ए हुस्न दिखा अपना।

बचा रखा है जिसे मैंने आप मेरा इमान तो नहीं लोगे।

 

रख दिया है भारती क़दमों में दिल अपना निकाल के।

रौंद पैरों तले मुझपर आप कोई इल्ज़ाम तो नहीं दोगे।

– श्याम कुंवर भारती , बोकारो,, झारखंड

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