मनोरंजन

श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेई – सविता सिंह  

दिन था सचमुच स्वर्णिम,

जिसे विधि ने स्वयं

अपनी लेखनी से किया अलंकृत।

कृष्णा वाजपेई की कोख से

भारत-रत्न का हुआ अवतरण,

पिता श्री कृष्ण बिहारी

ग्वालियर में शिक्षक,

संस्कारों से भरा जीवन।

जहाँ में होते हैं लोग बहुत अल्प,

जो नाम के अनुरूप

कर्मों से करें कायाकल्प,

उन्हीं में से एक देदीप्यमान

श्रीमान अटल।

सहज, सरल, सजग, निर्मल,

लेखनी जिसकी उगलती गरल,

पिता थे कवि,

तो पड़नी ही थी

उनमें वही छवि प्रबल।

चेहरा करुणामयी आभा से भरा,

वाणी प्रखर, विचार खरा,

लोगों से यूँ लोहा मनवाया,

कि राष्ट्र ने नेतृत्व में

विश्वास पाया।

प्रतिभा थी अति विलक्षण,

पोखरण में कराया

परमाणु परीक्षण,

स्वर्णिम चतुर्भुज, ग्राम सड़क योजना,

सर्व शिक्षा अभियान की परिकल्पना।

टेलीकॉम क्षेत्र में क्रांति लाई,

कारगिल में विजय पताका फहराई,

बहुमुखी प्रतिभा के धनी,

भारत-रत्न से विभूषित,

अनेक अलंकारों से सुशोभित।

कई बार देश का किया नेतृत्व,

संयुक्त राष्ट्र संघ में

हिंदी में भाषण देकर

भारत को किया गौरवान्वित।

ऐसे आदरणीय, पूजनीय

अटल बिहारी वाजपेई जी का

आज जन्मदिन है,

इसीलिए 25 दिसंबर

सदैव स्वर्णिम है।

भारत के भाल,

देश के सच्चे लाल,

एक ही कोशिश

तिरंगा ऊँचा रहे हर हाल।

अंतिम फर्ज भी

देश के लिए निभा गए,

16 अगस्त को अंतिम विदा ली,

पर झंडे पर आँच

कभी न आने दी।

नमन उन्हें

देश ही नहीं,

विश्व के भी

सर्वप्रिय, सच्चे नेता।

-सविता सिंह मीरा.

जमशेदपुर, झारखंड

Related posts

हे द्वारकाधीश – रेखा मित्तल

newsadmin

गीत – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

पूर्णिका (निशाना-ए-इश्क) – श्याम कुंवर भारती

newsadmin

Leave a Comment