मनोरंजन

बुद्ध अभिकेंद्रित अवदान साहित्य का हुआ लोकार्पण

neerajtimes.com औरंगाबाद- औरंगाबाद जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में प्रसिद्ध कवयित्री एवं लेखिका डॉ सुमन लता लिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया।डॉ मुनेश्वर प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित लोकार्पण समारोह का संचालन महामंत्री धनंजय जयपुरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया है। तत्पश्चात डॉ सुमन लता द्वारा अपनी कृति पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा गया कि इसको लिखने की प्रेरणा हमें अपने अध्ययन काल में मिली मगध बुद्ध के बिना अधूरी है। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह ने कहा कि शोध के थेसिस को पुस्तकालयों की शोभा बढाने के बजाय प्रकाशित कर आम जन के सामने लाना चाहिए। रोहतास जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष दीपक पांडेय ने कहा कि ज्ञान की पताका को पीढ़ी दर पीढ़ी को बताते रहना चाहिए चाहिए। आज हमें युद्ध नहीं बुद्ध की जरूरत है।नागेंद्र केसरी, अनुज बेचैन एवं सुमन अग्रवाल ने काव्य पाठ किया। राजेश बौद्ध ने कहा कि बौद्ध साहित्य ने पुरे विश्व में क्रांति लाई है। वंदना वीथिका द्वारा वीर रस से परिपूर्ण काव्य पाठ किया गया।सुरेश विद्यार्थी ने कहा औरंगाबाद में बौद्ध साहित्य पर मिथिलेश मधुकर और डॉ सुमन लता ने ऐतिहासिक कार्य किया है।कविता सहाय द्वारा संगीतमय संस्कृत भाषा में काव्य पाठ किया गया जिसमें सुमन लता जी को पत्रिका लिखने के लिए बधाई दी।डॉ राम सिंहासन सिंह ने कहा कि बोधगया की धरती ज्ञान की धरती है। जब साहित्य में दर्शन आ जाता है और दर्शन में साहित्य आ जाता है वह अलौकिक और अद्भुत हो जाता है। अध्यात्म के बिना साहित्य अधूरी है। शिक्षा पूर्ण के बाद ही दीक्षांत समारोह आयोजित किए जाते हैं। डॉ श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने पुरी दुनिया में ज्ञान की ज्योति जो फैलाई है इसमें ज्ञान की धरती बोधगया का महत्वपूर्ण स्थान है। डॉ राजीव रंजन ने कहा कि बोधगया की मिट्टी ऐसी है जिसने सिद्धार्थ को बुद्ध बना दिया था। डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि आज से तीन दशक पूर्व जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन औरंगाबाद की स्थापना हुई थी।46 वीं कृति के रूप में डॉ सुमन लता जी की यह पुस्तक शोधार्थी विद्यार्थियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। डॉ विजय गुंजन ने काव्य पाठ के माध्यम से बौद्ध साहित्य की चर्चा की।ऊषा सिंह ने विरह वेदना से परिपूर्ण काव्य पाठ किया।डॉ रास दादा रास ने कहा कि जिंदगी में प्यार का प्रवाह होना चाहिए तभी जिंदगी सफल हो सकती है।अध्यक्षीय उद्बोधन में दो मुनेश्वर प्रसाद ने कहा कि नारियों द्वारा साहित्य की रचना प्राचीन रही है। उसी परंपरा में डॉ सुमन लता जी हैं। बौद्ध साहित्य वर्तमान परिदृश्य में ज्यादा चर्चित हो गई है।धन्यवाद ज्ञापन नागेश्वर राय द्वारा किया गया। मौके पर सुनंदा केसरी,अभिलाषा सिंह,पूनम राय सहित अन्य उपस्थित थे। प्रेरणादायक सफल आयोजन हेतु कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी है।

Related posts

गीत — अनुराधा पाण्डेय

newsadmin

जय भीम – सुनील गुप्ता

newsadmin

चलो स्कूल चलें हम – अशोक कुमार यादव

newsadmin

Leave a Comment