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कविता – जसवीर सिंह हलधर

ऑपरेशन क्यों रोक दिया था, बीच राह संहार से ।

लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?

 

पहलगांव की घटना को हम, अब तक भूल नहीं पाए ।

दिल्ली की सड़कों पर फिर से , खूनी बादल घिर आए ।।

पढ़े लिखे अभियंता भी अब, आतंकी बन घूम रहे ।

और चिकित्सक कुछ आतंकी , ख़ास नशे में झूम रहे ।।

महबूबा को शर्म न आती , इनकी कारस्तानी पर ।

मौन उमर अब्दुल्ला बैठा, रंजित रक्त कहानी पर ।।

क्यों आतंको की बू आती, घाटी के घर द्वार से ?

लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ? 1

 

सूरज का दम घोट दिया है , तिमिर पले हैं दीप तले ।

हम तो भाई मान रहे हैं , आस्तीन में नाग पले ।।

हिंदू बिल को पास कराकर, चाचा स्वर्ग सिंधार गए।

हिन्दू की छाती पर चाचा ,सीधी बरछी मार गए ।।

मज़हब यदि आधार नहीं तो , कैसा ये बटवारा है ।

तोड़ो यह अनुबंध पुराना , पाकिस्तान हमारा है ।।

क्यों ना मटियामेट किया ये, पाक नाम संसार से ?

लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?2

 

चरखे वाली नीति पुरातन,काम नहीं आने वाली ।

कोयल के धोखे में हमने, पाल रखी कौवी काली ।।

आते हैं आतंकी दस्ते,रोज पड़ोसी देशों से ।

हमने काम चलाया अब तक,अमरीकी संदेशों से ।।

जो गोला बारूद भेजकर, भारत को दहलाते हैं ।

हम टर्की जैसे मुल्कों को , अन्न दवा भिजवाते हैं ।।

क्यों हम सीख नहीं लेते हैं , उसके इस किरदार से ?

लाल किले ने प्रश्न किया है , दिल्ली की सरकार से ?3

 

हम बोते हैं सत्य अहिंसा, और दया बुनियादों में ।

वो गजवा-ए-हिंद बो रहे , रोजाना औलादों में ।।

मैंने पढ़ी कुरान समूची ,सत्य तथ्य बतलाता हूं ।

नफ़रत पैदा करती हैं जो, वो आयत गिनवाता हूं ।।

एक ब्रह्म की रचना दुनिया, प्राण तत्व हम सब में है ।

लेकिन इस आतंकवाद का , मूल ख़ास मज़हब में है ।।

क्यों ये रोग पाल रक्खा है , दूर करो उपचार से ?

लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?4

 

नीति पुरानी में भारत को , संशोधन करना होगा।

पहले घर में गद्दारों का , देह दलन करना होगा ।।

आतंकी घटनाओं से अब , न्यायालय का दख़ल घटे ।

जो भी इसमें अड़चन लाए, पहले उसका शीश कटे ।।

जासूसों का जाल बिछाओ, चप्पा चप्पा जद में हो ।

आतंकों के पूर्ण नाश की, प्रतीज्ञा संसद में हो ।।

क्यों फ़िर आतंकी आएंगे, सीमा के उस पार से ?

लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?5

 

उक्त सुझावों के दम पर ही , गृह युद्ध टल पाएगा।

विश्व समूचा भारत मां की ,झोली से फल खाएगा ।।

वरना विश्व गुरु का नारा, अर्थहीन हो जाएगा ।

शंकर,गौतम ,महावीर का , मत विहीन हो जाएगा ।।

शब्द बहुत कड़वे हैं मेरे, अर्थों में सच्चाई है ।

छंदों में दर्शन दर्पण है, हलधर’ की कविताई है ।।

क्यों हम नाव चलाते आए,कागज़ की पतवार से ?

लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ? 6

– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

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