ऑपरेशन क्यों रोक दिया था, बीच राह संहार से ।
लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?
पहलगांव की घटना को हम, अब तक भूल नहीं पाए ।
दिल्ली की सड़कों पर फिर से , खूनी बादल घिर आए ।।
पढ़े लिखे अभियंता भी अब, आतंकी बन घूम रहे ।
और चिकित्सक कुछ आतंकी , ख़ास नशे में झूम रहे ।।
महबूबा को शर्म न आती , इनकी कारस्तानी पर ।
मौन उमर अब्दुल्ला बैठा, रंजित रक्त कहानी पर ।।
क्यों आतंको की बू आती, घाटी के घर द्वार से ?
लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ? 1
सूरज का दम घोट दिया है , तिमिर पले हैं दीप तले ।
हम तो भाई मान रहे हैं , आस्तीन में नाग पले ।।
हिंदू बिल को पास कराकर, चाचा स्वर्ग सिंधार गए।
हिन्दू की छाती पर चाचा ,सीधी बरछी मार गए ।।
मज़हब यदि आधार नहीं तो , कैसा ये बटवारा है ।
तोड़ो यह अनुबंध पुराना , पाकिस्तान हमारा है ।।
क्यों ना मटियामेट किया ये, पाक नाम संसार से ?
लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?2
चरखे वाली नीति पुरातन,काम नहीं आने वाली ।
कोयल के धोखे में हमने, पाल रखी कौवी काली ।।
आते हैं आतंकी दस्ते,रोज पड़ोसी देशों से ।
हमने काम चलाया अब तक,अमरीकी संदेशों से ।।
जो गोला बारूद भेजकर, भारत को दहलाते हैं ।
हम टर्की जैसे मुल्कों को , अन्न दवा भिजवाते हैं ।।
क्यों हम सीख नहीं लेते हैं , उसके इस किरदार से ?
लाल किले ने प्रश्न किया है , दिल्ली की सरकार से ?3
हम बोते हैं सत्य अहिंसा, और दया बुनियादों में ।
वो गजवा-ए-हिंद बो रहे , रोजाना औलादों में ।।
मैंने पढ़ी कुरान समूची ,सत्य तथ्य बतलाता हूं ।
नफ़रत पैदा करती हैं जो, वो आयत गिनवाता हूं ।।
एक ब्रह्म की रचना दुनिया, प्राण तत्व हम सब में है ।
लेकिन इस आतंकवाद का , मूल ख़ास मज़हब में है ।।
क्यों ये रोग पाल रक्खा है , दूर करो उपचार से ?
लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?4
नीति पुरानी में भारत को , संशोधन करना होगा।
पहले घर में गद्दारों का , देह दलन करना होगा ।।
आतंकी घटनाओं से अब , न्यायालय का दख़ल घटे ।
जो भी इसमें अड़चन लाए, पहले उसका शीश कटे ।।
जासूसों का जाल बिछाओ, चप्पा चप्पा जद में हो ।
आतंकों के पूर्ण नाश की, प्रतीज्ञा संसद में हो ।।
क्यों फ़िर आतंकी आएंगे, सीमा के उस पार से ?
लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ?5
उक्त सुझावों के दम पर ही , गृह युद्ध टल पाएगा।
विश्व समूचा भारत मां की ,झोली से फल खाएगा ।।
वरना विश्व गुरु का नारा, अर्थहीन हो जाएगा ।
शंकर,गौतम ,महावीर का , मत विहीन हो जाएगा ।।
शब्द बहुत कड़वे हैं मेरे, अर्थों में सच्चाई है ।
छंदों में दर्शन दर्पण है, हलधर’ की कविताई है ।।
क्यों हम नाव चलाते आए,कागज़ की पतवार से ?
लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ? 6
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून