है गौरव मुझे मेरी माटी का
जिस भूमि पे मैंने जन्म लिया !
रहूँगा बना सदैव उसका ऋणी…..,
उसके लिए प्राणों को तज दूंगा !!1!!
भाल पे सजाए तिलक माटी का
नित चलूं बढ़ाए देश का मान !
कर तन मन जीवन अर्पण सारा….,
सदैव करता चलूं राष्ट्र का सम्मान !!2!!
इस माटी की भव्यता सौरभ को
सम्पूर्ण विश्व में फैलाऊंगा !
देश धरा का नाम बढ़ाकर…..,
मातृभूमि के गीत सुनाऊंगा !!3!!
धर्म संस्कृति की पताका फहराकर
सदा करता चलूँगा देश का नाम !
अपनी बोली मातृभाषा अपनाकर…..,
करता रहूँगा भाषा का उत्थान !!4!!
अपनी माटी और देश का गौरव
कभी नहीं तनिक कम होने दूंगा !
सदा माटी का फैलाते सौरभ……,
जीवन को सुरम्य रंगों से भर दूंगा !!5!!
सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान