neerajtimes.com बोधगया / रायबरेली। ज्ञान और मोक्ष की पवित्र भूमि बोधगया एक महत्वपूर्ण वैचारिक मंथन का केंद्र बनने जा रहा है। आचार्यकुल का तीन दिवसीय राष्ट्रीय /अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन 16 से 18 दिसम्बर, 2025 को बोधगया से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित बोधि ट्री स्कूल, श्रीपुर (बोधि ट्री एजुकेशनल फाउंडेशन) में आयोजित किया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य महात्मा गांधी, संत विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की रचनात्मक विचारधाराओं को अंगीकार करने वाले चिंतकों को एक मंच पर लाना है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के आचार्यकुल के सदस्य, भूदान यज्ञ के प्रतिनिधि, साहित्यकार, कवि, पत्रकार और समाजसेवी शामिल होंगे। संत विनोबा भावे जी की मानस पुत्री और आचार्यकुल की स्थायी ब्रह्मचारिणी, सुश्री प्रवीणा देसाई के अनुसार, इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन बोधगया की पावन धरती पर किया गया है ताकि विश्वभर के निर्भिक, निष्पक्ष, अहिंसक, असंप्रदायिक, अराजनैतिक चिन्तकों के विचारों का समागम हो सके। यह अधिवेशन वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच गांधीवादी और रचनात्मक सोच की प्रासंगिकता को स्थापित करने का एक प्रयास है।
आचार्यकुल के पूर्व कुलपति एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आचार्य धर्मेन्द्र के नेतृत्व में यह तीन दिवसीय अधिवेशन कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। अधिवेशन का मुख्य एजेंडा कई दूरगामी और ऐतिहासिक महत्व के विषयों पर विचार-विमर्श करना है। विचारणीय बिषयों में शामिल हैं:। 2027 में आचार्यकुल के 60वें वर्षगांठ की भव्य तैयारी की रूपरेखा। स्थापना वर्ष 2026, 2027 एवं 2028 हेतु आचार्यकुल के प्रमुख कार्यक्रम ‘जय जगत’ की गतिविधियों पर मंथन। भूदान यज्ञ आन्दोलन के 75वें वर्ष (2026) के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रमों के आयोजन पर विचार। चरखा संघ के स्थापना वर्ष पर भी महत्वपूर्ण चर्चा। ग्राम सभा सहयोग अभियान को सशक्त बनाने की रणनीति। विभिन्न संगठनात्मक कोषांगों के कार्यों की समीक्षा और सदस्यता अभियान का विस्तार। साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता प्रकोष्ठ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सशक्त बनाने, गठन और विस्तार पर गहन विचार। राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा, जो वैचारिक मंथन के साथ कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बनेगा ।
आयोजक मंडल के हवाले से रायबरेली काव्य रस मंच भारत के संस्थापक वरिष्ठ कवि डा. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ और संरक्षक/प्रशासक- सुधीर श्रीवास्तव केकि राष्ट्रीय अधिवेशन काल में सभी प्रतिनिधियों के ठहरने एवं भोजन की व्यवस्था 15 दिसम्बर की संध्या से 19 दिसम्बर के सुबह तक पूर्णतः निःशुल्क रहेगी। हालांकि, प्रतिभागियों को अपना यात्रा व्यय स्वयं वहन करना होगा। समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए, सभी संभावित प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी आगमन की तिथि और समय निर्धारित कर पहले ही आयोजकों को सूचित करें। यह अधिवेशन न केवल आचार्यकुल के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि महात्मा गांधी और विनोबा भावे के रचनात्मक एवं अहिंसक विचारों की मशाल को वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक साधन है।
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