मनोरंजन

ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर

गुरु नानक उच्च विचारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।
गुरु अंगद के उदगारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।।

गुरु तेग लहू की धारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।
गुरु गोविंद के उपकारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।।

एक माँ ने बेटे चार जाने चारो भारत पर लुटा दिए ,
गुरु माँ के राजदुलारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

सदियों तक खून बहाया है सिक्खों ने हार नहीं मानी ,
रण में लहरी तलवारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

सरदारों ने ही झेला था जलियांवाला भीषण तांडव ,
बच्चों की चीख पुकारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

बदला लेने जो जा पहुँचा डायर की उन करतूतों का ,
ऊधम जैसे दिलदारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

वो भगत सिंह था दीवाना इतिहास बनाकर चला गया ,
सुखदेव राजगुरु यारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

इक लाल लकीर खिंची ऐसी गुरु नानक का घर ले बैठी ,
सैंतालीस के बटवारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

इंद्रा गांधी की हत्या तो एक आतंकी घटनाक्रम था ,
उन राख हुए गुरुद्वारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

कट गए शीश परवाह नहीं लड़ गए कबंध सरहदों पर ,
रंजिते की तलवारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।

“हलधर”इतना कुछ होने पर भी हिम्मत कौम नहीं हारी ,
गुरु के प्यारे सरदारों का क्या मोल चुकायेगी दिल्ली ।
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

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