जब चाही तब याद करी तोहके ई हक़ होला हमार।
केहू औरी बसल बा दिल में ई शक होला तोहार।
तोहरे नाम से ख्वाब महल बनाई ई मर्जी बा हमार।
ख्वाब महल पर हमरे हक पहिला बेशक होला तोहार ।
चाही कुछु और बोला डाल देब सब पांव में तोहरे हम।
छोड़ा चान तारा लिख दी ब्रह्माण्ड भरसक होला तोहार।
बोला त लिख दी दिल क सभ जायदाद ख़ज़ाना हम।
मुस्का दा प्यार से बस एतना दिल धक ई होला हमार।
तोहरे प्यार बेकार बा सब धन दौलत सोना औरी चानी।
देख झलक तोहार भाव अमीर अबतक होला हमार।
आदत हमके तरसावे छोड़ आजा लगाला दिल हमसे।
तोहरे प्यार में मर मिट जाई भारती सबक होला हमार।
-श्याम कुंवर भारती (राजभर). बोकारो,झारखंडm मॉब.9955509286