करे जो देश की सेवा,उन्ही के नाम होते हैं।
लड़े जो देश की खातिर,नही गुमनाम होते हैं।
सुनो बातें जमाने की,निकाले दोष गैरो के।
नही दिखती कमी अपनी सदा गुलफाम होते हैं।
बचाते हैं वो अस्मत भी,गवाही भी सदा देते।
जमाने भर मे ऐसे लोग ही बदनाम होते हैं।
यकीं मानो मुहब्बत मे खुदा का नूर है बरसे।
करे सच्ची इबादत जो वही तो राम होते हैं।
बिना लालच किये कोई,नही करता भलाई भी।
दगाबाजी सदा करते,वही बदनाम होते है।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़