मनोरंजन

कविता – नीलांजना गुप्ता

 

टूट गईं हैं सब जंजीरें भारत माँ मुस्काती है।

बीती हुई शौर्य गाथाएं हमकों आज सुनाती।।

 

यही धरा है जहाँ सनातन धर्म-संस्कृति जन्मी थी।

भूमि है ऋषि-मुनियों की जहाँ सभ्यता पनपी थी।

करवट बदल रही भारत माँ जाग उठी है तन्द्रा से,

स्व को पहचान लिया है विजय ध्वजा फहराती है

बीती हुई शौर्य गाथाएँ………

 

भारत है वटवृक्ष सुदृढ़ ये विश्व ने लोहा माना है।

भारत माता की शक्ती को दुनियाँ ने पहचाना है।

संयम,त्याग, तपस्या के स्वमंत्र प्रस्फुटित होते हैं,

खून-पसीने से अपने जीवन – बीज हम बोते हैं।

जड़ें हैं जितनी गहरी उतना अम्बर छूती जाती है।

बीती हुई शौर्य गाथाएँ…….

 

मानवता है मूल मंत्र हमने पहचान बनाई है।

आध्यात्मिक उन्नति से विश्व शक्ति चकराईहै।

धर्म और दर्शन भारत का विश्व को सम्बल देता है,

मुक्तहस्त कर रहा दान बदले में कुछ न लेता है।

वैश्विक स्तर पर भी इसने अपना रूप निखारा है,

इसके साहस के समक्ष दुश्मन भी अब हारा है।

 

भारत की महिमा अनन्त है सारी दुनिया गाती है।

बीती हुई शौर्य गाथाएँ हमको आज सुनाती है। ।

-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

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