आवा आवा मईया हो लेला अवतार
दरसनवा तरसे अंखियां हमरो।
रोई रोई बलका करेला गुहार हो,
डगमग नईया डोले बीच मझधार हो।
आके मईया भगता करा अब उद्धार हो।
दरसनवा तरसे अंखियां।
सँझवा बिहनवा तोहके दियनवा जराइब।
हलुआ सौहारी सोरहो व्यंजनवा चढ़ाइब ।
झर झर बहेला नैना धार हो,
दरसनवा तरसे अंखियां।
गइया के घियवा रुइआ के बाती।
सोनवा के दियना करब हम आरती।
बेला चमेली अडहुलवा के हार हो।
दरसनवा तरसे अंखियां।
गइया के गोबरा से दुअरा लिपवली।
सोनवा के रथवा में असना लगवली।
भारती पखारे चरणा तोहार हो।
दरसनवा तरसे अंखियां।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)
बोकारो,झारखंड, मॉब.9955509286