जय माँ चंद्रघंटा देवी,
तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
चंद्र की तरह तुम्हारा मुख है,
घंटा की तरह आपकी आवाज़।
तुम्हारे दस हाथ, दस विद्याएं,
तुम्हारी शक्ति से हमें सिद्धि मिले।
तुम्हारी कृपा से हमें शांति मिले,
तुम्हारी शक्ति से हमें भक्ति मिले।
तुम ही हैं शक्ति की अधिष्ठात्री,
तुम ही हैं हमारी रक्षक।
तुम्हारी पूजा से हमें मोक्ष मिले,
तुम ही जीवन का सही मार्ग बताए।
माँ चंद्रघंटा तुम्हारी महिमा अपरम्पार,
तुम्हारी शक्ति से हमारा जीवन हो जाय पार,
तुम्हारी कृपा से हमारा जीवन सुखी हो जाए,
तुम्हारी शक्ति से हमारा जीवन सशक्त हो जाए।
– कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन रिंग रोड, जोगीवाला देहरादून