मज़हब की उठती लहरों पर,ले अपनी नाव उतर जाते ।
घर का बटवारा रुक जाता ,बापू कुछ ऐसा कर जाते ।।
सब शक्ति परक प्रतिमानों पर ,होता प्रचण्ड भारत मेरा ।
दुनिया में धाक अलग होती , दिखता अखण्ड भारत मेरा ।।
तब भारत पाक सरहदों पर ,क्यों भीषण युद्ध हुए होते ।
बटवारे में हिंदू मुस्लिम ,दंगों में प्राण नहीं खोते ।।
जिन्ना को समझते बापू ,नेहरू फिर भला किधर जाते ।
तब चीन सरीखे मुल्कों के दावे निर्मूल बिखर जाते ।।1
उत्पादन से उपभोग तलक ,सब अर्थ तंत्र अंदर होता ।
इतिहास बदल जाता सच में ,भूगोल बहुत सुंदर होता ।।
आचार संहिता सम होती , क्यों मज़हब की रंजिस होती ।
आरक्षण जैसे दानव की , क्यों भारत में बंदिश होती ।।
जिन्ना नेहरू दोनों के ही मतभेद आग में जर जाते ।
जिन्ना प्रधान बना देते तो, नेहरू भाग किधर जाते ।।2
तब भारत से टकराने की,कोई नादानी ना करता ।
अमरीका जैसा देश हमारे ,सम्मुख तब पानी भरता ।।
नहरू के सम्मुख लोह पुरुष ,खुद किया आपने था दुर्बल ।
भगवान मान पूजा होती ,यदि करते ना यह काज निवल ।।
अपना वह रूप दिखा देते ,जो नेहरू जिन्ना डर जाते ।
निर्जला आमरण व्रत करते,धरना देते या मर जाते ।।3
जिन्ना पटेल दोनों को ही ,संयुक्त प्रधान चुना होता ।
भारत माता का दुनिया में ,वैभव तब कई गुना होता ।।
नहरू प्रधान बनाने का ,उदघोष आपका था बापू ।
इतिहास बताता है हमको ,ये दोष आपका था बापू ।।
भारत का खंडन बच जाता, हिंदू मुस्लिम सब तर जाते ।
शब्दों की सीमा से बाहर , क्यों कविता में ‘हलधर’ जाते ।।4
– जसवीर सिंह हलधर , देहरादून