नहीं यहाँ दुःखी कौन, तुम क्यों दुःखी हो, सागर है दुःख का, संसार सारा यह।।
नहीं कौन गुम यहाँ पर, अपने ही गम में,पाला है तुमने क्यों गम, दिल में सारा यह।।
नहीं यहाँ दुःखी कौन, तुम क्यों दुःखी—————-।।
समझा है किसने दुःख तेरे दिल का, किसको है तुमसे सच्ची मोहब्बत।
चाहा नहीं है किसने अपना भला, तुमपे लुटाई है किसने अपनी दौलत।।
फिर क्यों बहाता है सबके लिए तू , आँसू यहाँ अपने यह।
नहीं यहाँ दुःखी कौन, तुम क्यों दुःखी————–।।
आदत है लोगों की साथ नहीं देंगे, नेक करेगा जो उसको लूट लेंगे।
भलाई के बदले बुराई मिलेगी, लुटाई खुशी गर खुशी तुम्हें नहीं देंगे।।
फिर क्यों लुटाता है सबके लिए तू, अपनी खुशी और दौलत यह।
नहीं यहाँ दुःखी कौन, तुम क्यों दुःखी—————।।
चुकाया है किसने कर्ज उस लहू का, जिसकी बदौलत जी.आज़ाद है हम।
जिसकी बदौलत हस्ती है अपनी, जिसकी बदौलत यहाँ आबाद है हम।।
फिर क्यों मिटाता है सबके लिए तू , यहाँ बेवजह अपनी हस्ती यह।
नहीं यहाँ दुःखी कौन, तुम क्यों दुःखी—————।।
– गुरुदीन वर्मा आजादी, तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)