खा कर के ठोकरें ना बताऐ किसी से हम,
लेकर चले सबक है बड़ा जिंदगी से हम।
.वादा किया है खुद से,निभाना जरूर है,
ठानी थी दिल मे अब न मिलेगें किसी से हम।
टूटा है आज दिल भी अँधेरा सा छा गया,
जल्दी बना लेगे इक रिश्ता खुशी से हम।
सपने बुने थे यारा बडे दिल से आपके,
खुशहाल भी हुएँ हैं उनकी दोस्ती से हम।
धोखा किया था उसने दगा आज दे गया।
दिन रात याद करते रहे बेबसी से हम।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़