मनोरंजन

चाँदनी रात – डॉ. सत्यवान सौरभ

 

चाँदनी रात आई आई,

सितारे झिलमिलाए।

नन्हे पाँव चलते धीरे-धीरे,

सपनों के रंग लाए।

 

हवा में खुशबू मीठी-मीठी,

पंछी गाएं गीत प्यारे।

माँ की लोरी सुनते-सुनते,

नींद में खो जाएं सारे।

 

रात की चाँदनी नर्म-नर्म,

सपनों को दे रंगीन।

सुबह जब सूरज चमकेगा,

फिर आएगा दिन हसीन।

– डॉ सत्यवान सौरभ, 333, परी वाटिका,

कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी)

भिवानी, हरियाणा – 127045,

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