चल तू चल साथ मेरे, चल रहा हूँ मैं भी।
मत समझ खुद को अकेले, चल रहा हूँ मैं।।
चल तू चल साथ मेरे———————।।
खुद को हीन मत बना तू , आँसू मुझको दे दे।
तेरे अपनों की तरहां ही, चाह रहा हूँ मैं भी।।
चल तू चल साथ मेरे———————-।।
मानता है गर दुश्मन, मुझको यह दिल तेरा।
लेकिन तेरे बिना नहीं, जी रहा हूँ मैं भी।।
चल तू चल साथ मेरे———————।।
किससे खता होती नहीं, नाराजगी भी अब छोड़ो।
तेरी खुशी की दुहा, कर रहा हूँ मैं भी।।
चल तू चल साथ मेरे————————।।
कम से कम तू सोच जरा, अपने ख्वाबों के लिए।
ख्वाब तेरे सच हो, खूं बहा रहा हूँ मैं भी।।
चल तू चल साथ मेरे——————–।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (रा जस्थान)