झूला झूलो, चाँद के संग,
सितारों की छाँव में रंग।
हवा के झोंके नन्हे पंख,
सपनों में उड़ें दिल के तंख।
माँ की लोरी सुनते-गाते,
ख्वाबों के द्वार सजाते।
रात की ठंडी चादर तले,
खुशियों से भरे दिल के मेले।
सुबह की पहली किरण से,
नया दिन लाएं हम सभी।
खेलें, हँसें, सीखें साथ,
बचपन हो खुशियों का हाथ।
– डॉ सत्यवान सौरभ, 333, परी वाटिका,
कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी)
भिवानी, हरियाणा – 127045,