( 1 ) चलें
हर पल निभाते दोस्ती,
हँसते गाते, करते मौज मस्ती !!
( 2 ) भूलें
दुःख में न दोस्ती,
रहें बाँटते गम, बहाते प्रेम कश्ती !!
( 3 ) मिलें
दिल में बसाए दोस्ती,
बिन काम बहाने करें मटरगश्ती !!
( 4 ) खिलें
फूलों सी ये दोस्ती,
महकाए मन कानन को तरोताज़ा बनाती !!
( 5 ) पले
मुस्कुराए सदैव ये दोस्ती,
ताउम्र बसी रहे ये मित्र बस्ती !!
( 6 ) टूटे
कभी न ये दोस्ती,
मिटती चली जाए भले ये हस्ती !!
( 7 ) मानें
प्रारब्ध से जोड़े है दोस्ती,
बिन ईश्वरीय रज़ामंदी न होए दोस्ती !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान |