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सावन के फुहार – श्याम कुंवर भारती

बरसेला सावन के फुहार हो।

सवनवा जियान कईला सजना।

 

यही रे सवनवा पिया गईले परदेशवा,

सावन में भुलाई भईला बेईमान हो,

सवनवा जियान कइला ……….।

 

सावन के फुहार तन मन भींजावेला,

सजनी के छोड़ी भइला नादान हो,

सवनवा जियान कइला……….।

 

घरवा जे रहता पिया झुलवा झुलवता,

पेंगिया लगवता झुलवा आसमान हो,

सवनवा जियान कइला ………।

 

घेरी जब अकसवा में कारी बदरिया,

कजरी गाई देईब मीठ मुस्कान हो,

सवनवा जियान कइला सजना।

– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखण्ड

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