मैं अपने जीवन की और कहानी, लिखूँ क्या आगे।
मैं अपने जीवन की और जुबानी, कहूँ क्या आगे।।
क्या छुपाया है, क्या बताया नहीं, जिसको अब बताऊँ मैं।
मैं अपने जीवन की और बयानी, लिखूँ क्या आगे।।
मैं अपने जीवन की और कहानी——————।।
कहता है कौन, यह नहीं मिला मुझको यहाँ किसी से।
सब है दोस्त यहाँ मेरे, नहीं गिला मुझको किसी से।।
रहता हूँ सबसे हिल मिलकर, नहीं है कोई दुश्मन मेरा।
मैं अपने यारों की और निशानी, दिखाऊँ क्या आगे।।
मैं अपने जीवन की और कहानी——————।।
क्या नहीं पाया है मैंने, अपनों में रहकर।
मैं हुआ हूँ इस काबिल, अपनों में ही जीकर।।
नहीं भुला मैं उनके अहसान, जो बहुत है मुझ पर।
मैं अपने अपनों की और रूहानी, बताऊँ क्या आगे।।
मैं अपने जीवन की और कहानी——————।।
वैसे तो यहाँ सभी को, मालूम है कि वह है क्या।
क्यों है खफ़ा वह मुझसे, और खता क्या है मेरी।।
अपना माना था मैंने उसको, की है उसकी इज्जत बहुत।
मैं अपने मोहब्बत की और रूहानी, सुनाऊँ क्या आगे।।
मैं अपने जीवन की और कहानी——————।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)