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सावन में आखिर मन शिवमय क्यों – सुनील गुप्ता

( 1 ) सावन में
बरसें जब मेघ मल्हार.,
तब मन नाचे, डालें शिव पे जलधार !!

( 2 ) सावन में
कूके जब कोयल मोर.,
तब मन करता चले, शिवपूजा अपार !!

( 3 ) सावन में
पड़ें जब अमवा डारि झूलें.,
तब मन शिवमय बन, झूमें संग बहार !!

( 4 ) सावन में
निकलें जब कांवड यात्राएं.,
तब चहुँ ओर दिखें, भक्तों की लंबी कतार !!

( 5 ) सावन में
भीगें जब तन मन हर्षाएं.,
तब करें शिवपे, हम सुंदर अप्रतिम श्रृंगार !!
– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान |

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