मनोरंजन

नमःपार्वती, हर-हर महादेव – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

 

तन सजे मृग छाला गले में है नाग माला,

मुद्रा दिखती कृपाला, मन से प्रणाम है।

 

भस्म सर्व अंग सोहे मनोरम रूप मोहे

भाल पे मयंक छवि नयनाभिराम है।

जटाओं से गंग धार श्रद्धा भरी है अपार

जगत कल्याण हेतु बहे अविराम है।

 

नंदी, कार्तिक, गणेश सुत गण हैं विशेष

गौरा संग शिव पूजा होती अष्टयाम है।

 

तन सजे मृग छाला गले में है नाग माला,

मुद्रा दिखती कृपाला, मन से प्रणाम है।

 

भस्म सर्व अंग सोहे मनोरम रूप मोहे.

भाल पे मयंक छवि नयनाभिराम है।

 

जटाओं से गंग धार श्रद्धा भरी है अपार.

जगत कल्याण हेतु बहे अविराम है।

 

नंदी, कार्तिक, गणेश सुत गण हैं विशेष.

गौरा संग शिव पूजा होती अष्टयाम है।

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

Related posts

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

newsadmin

गीतिका – मधु शुक्ला

newsadmin

साफ होनी चाहिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दिमागी गंदगी? -प्रियंका सौरभ

newsadmin

Leave a Comment