मरोड़ा जनी सइयां छोड़ा मोर नरमी कलइया।
गोरी बहियां खनके चूड़िया छोड़ा मोर नरमी कलइया ।
नाजुक बदन मोर नाजुक बा उमरिया।
लच लच लचके मोर नाजुक कमरिया।
लह लह लहके बदन बिना तिल्ली सलईया।
सइयां छोड़ा मोर नरमी कलइया।
भरल गगरिया पनिया छल छल छलके।
उमड़ल उमरिया यौवन मोर रही रही बहके।
सावर सवरियां मोर लेईब तोर बलइया
सईयां छोड़ा मोर नरमी कलइया।
उड़ावेला पवनवा मोर कोरी चुनरिया।
भावेला सूरतिया तोहार मोर सावर सवरिया।
छेडा जनी लहकी बदन मोर एही में भलइया।
मरोड़ा जनी सइयां छोड़ा मोर नरमी कलइया।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर), बोकारो, झारखण्ड