( 1 )” धी “, धीरे
शनै: शनै:
ध्यान लगाएं !!
( 2 )” म “, मन
स्थिर करके
आत्मरमण करें !!
( 3 )” हि “, हिय
अंतस में
ॐकार सुनें !!
( 4 )” धीमहि “, धीमहि
मंत्र गायत्री
जाप करें !!
( 5 )” धीमहि “, धीमहि
अंतरात्मा का
दर्शन कराए !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान
ग़ज़ल – रीता गुलाटी
नाचता दिल पिया के आने से,
खुद को कहते बड़े दिवाने से।
नेकिया हमने की जमाने से,
वो कहाँ अब छुपी छिपाने से।
नींद मेरी मुझी से है रूठी,
रोज़ सप़नों मे तेरे आने से।
दिन वो बचपन के थे सुहाने से,
याद आते लगे तराने से।
यार कैसे सहे जफा तेरी,
भूलती याद कब भुलाने से।
दूर अब तू कभी नही होना,
खुश मैं होती तेरे ही आने से।
खाकसारी नही दिखी जग मे,
लोग बचते निग़ाह मिलाने से।
अब कहाँ अमल लेते आयते भी,
लोग बचते हैं कुछ पढ़ाने स़े।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़