मिलन होगा, मिलेंगे हम, कि मिलने आ गए हैं हम।
कि छोड़ो तुम यह शर्माना, हटाओ अब यह पर्दा तुम।।
कदम अपने बढ़ाओ तुम, मिलो आकर हमसे तुम।
मिलन होगा, मिलेंगे हम————————-।।
तुम्हें हमराह हमने, अपना बनाया है जीवन में।
हजारों ख्वाब तुम्हें चुनकर, सँजोये हैं जीवन में।।
सुनहरे रंगों से रंगकर, तस्वीर तेरी बनाई है।
हटावो हाथ चेहरे से, करो दीदार आकर तुम।।
मिलन होगा, मिलेंगे हम—————–।।
किसी की क्यों करें तारीफ, नहीं कोई तेरे जैसा।
हसीन हो तुम फूलों सी, चेहरा तेरा कमल जैसा।।
महक बनकर चमन में तुम, महकाती हो हवा को।
महकायेंगे हम भी दिल को, तुम्हें दिल से लगाकर हम।।
मिलन होगा, मिलेंगे हम————————-।।
बनी हो आज तुम दुल्हन, रचाकर हाथ हिना से।
सजायी है फूलों से सेज, हमने भी अरमां से।।
तोड़ो खामोशी तुम अपनी, दीवारें तोड़ रस्मों की।
किसी का खौफ नहीं हमको, सुनेंगे नहीं किसी की हम।।
मिलन होगा, मिलेंगे हम————————-।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)