मनोरंजन

बचपन की गुनगुनाहट- डॉ. सत्यवान सौरभ

 

नन्हें कदमों की छप-छप छप,

बारिश में कागज़ की कश्ती का सफर,

सूरज की किरनें, चंदा की बातें,

परियों के किस्से, सपनों की रातें।

 

तितली के संग फूलों पर झूले,

हर रंग से बचपन अपना रंग घोले।

परीलोक की बातें, आसमान की उड़ान,

सपनों का जहां, है कितना महान।

 

कभी तारे तोड़ लाएं मुट्ठी भर,

कभी झूमें जैसे पवन का हिलोर।

हर हँसी में हो सूरज की चमक,

हर आँसू में हो सागर की झलक।

 

माँ की गोद का नर्म सा तकिया,

पापा की उंगली से पकड़ें दुनिया।

मिट्टी की खुशबू, बारिश की बूँद,

बचपन की दुनिया, बस यूँ ही अनमोल।

 

 

– डॉo सत्यवान सौरभ 333, परी वाटिका,

कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी,

हरियाणा – 127045, मोबाइल :9466526148,

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