मनोरंजन

गीतिका – मधु शुक्ला 

 

रक्तदान से मानवता को , बल मिलता संसार में,

परहित का जज्बा इस गुण‌ को, लाता है व्यवहार में।

 

संकट के क्षण बिना बताये, जब ले आते काल को ,

रक्तदान का महादान ही‌, मित्र बने  उपचार  में।

 

दुर्घटनाओं की क्षति पूरी, होती  नहीं  लहू बिना,

जीवन दान सहायक बनता, दान लहू‌ आधार में।

 

योगदान आवश्यकता पर, राह दिखाये शांति की ,

मानव मन को लिप्त रखे यह, करनी‌ ही उपकार में।

 

रक्तदान का भाव जहाँ पर , रहता है सम्मान से,

विपदाएं टल जातीं पल में, विश्वास बढ़े प्यार में।

— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश

Related posts

ग़ज़ल – ज्योति श्रीवास्तव

newsadmin

सबको बताना सही है – अनिरुद्ध कुमार

newsadmin

पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती

newsadmin

Leave a Comment