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रानी लक्ष्मी बाई – श्रीमती निहारिका झा

 

भारत की गौरव गाथा की

अजर अमर वो कहानी थी

मातृ भूमि पर जान निछावर

कर गई वो बलिदानी थी।।

लक्ष्मी बाई नाम था जिसका

झांसी वाली रानी थी।

नहीं झुकी वो नहीं रुकी वो

रण में सब पर भारी थी

मातृ भूमि पर जान लुटाती

भारत की वो नारी थी।।

नाम मनु बचपन में पाया

सबकी राज दुलारी थी।

खेल खिलौने गुड्डे गुड़िया

उसे कभी ना भाए थे।

भारत मां आजाद  रहे

भाव यही समाये थे ।

बना सुयोग राजा संग

बन गई झांसी की रानी।

नीति डलहौजी की

राज रानी को  ना भायी थी

अंग्रेजों को दूर भगाने

हठ मन में यह ठानी  थी

चंद सैनिकों के संग  रानी

अंग्रेजों पर टूट पड़ी

अंग्रेजों  की साजिश का

थी शिकार फिर  रानी थी

लड़ते लड़ते रण भूमि में

रानी घायल बड़ी हुई।

पर हिम्मत मजबूत बड़ी थी

छोड़ के रण ना भागी थी

मजबूती से डटी रही

दुश्मन के आगे रानी थी

सारी सेना मार काट कर

वीरगति को प्राप्त हुई।।

लिखा सुनहरे हर्फों  में

रानी का लक्ष्मी का था नाम।

इतिहास में आज भी जिंदा

झांसी की रानी  का  नाम।

(“बलिदान दिवस 18जून”)

श्रीमती निहारिका झा, खैरागढ़ राज ,छत्तीसगढ़

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