मनोरंजन

पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती 

 

दिल पर अपने मैने तेरा नाम लिखा है।

मेरे महबूब मैने तुझे सलाम लिखा है।

 

मुस्कुराओ फूल खिले हंसों तो मोती झरे।

तुमसे है बहार मैने तुझे पैगाम लिखा है।

 

मेरी जानेमन और चैन-ओ-सुकून  हो तुम।

तुमसे है इश्क मुझे तुझे सरेआम लिखा है।

 

उठे नजर तो सुबह झुके तो शाम होती है।

तेरी आंखों मैने तुझे सुबह शाम लिखा है।

 

मिटा दो भरम भारती का इल्तिज़ा है मेरी।

मुझसे हैं प्यार कहो तुझे अंजाम लिखा है।

– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखण्ड

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