बस वो आया,जिंदगी मे और खुशी देता गया,
खुश्बूओ का था वो पेकर,जिंदगी महका गया।
जिंदगी है खूबसूरत जो भरी हो प्यार से,
प्यार ही ताकत है तेरी वो मुझे समझा गया।
जिस्म की हर साँस मे बस नाम मैं लिखता गया,
मुझमें साँसे छोड़ दी बस जिंदगी लेता गया ।
आज के बच्चे बड़े हैं होशियारी वो करे,
साथ मिलकर खुश रहेगे आज ये सपना गया।
वक्त कैसा आज आया दर्द हम किससे कहे,
था भरोसा, है जो अपना तोड़ कर वादा गया।
दूसरो का दर्द अब समझा नही कोई यहां,
हो गया खामोश बस ये सोचकर हारा गया।
जी रही बच्चों की खातिर रात दिन मेहनत करे,
आज रोयी माँ भी जब परदेस को बेटा गया।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़