मनोरंजनजज्बाती कश्मकश का एक अक्स – राजू उपाध्याय by newsadminJune 18, 20240267 Share0 यह बावला दिल तो मान गया लेकिन, दिमाग उलझाता रहा मुझे…! अजब बात हुई सजदे में, तू ही तू नजर आता रहा मुझे…! हर मुमकिन मश्क्कत की , जब हमने तुझे भूल जाने की मगर, जितनी की तदबीरें बचने की, तू और याद आता रहा मुझे…। – राजू उपाध्याय, एटा , उत्तर प्रदेश